बाह्य परिक्रमा (बाहरी कोरा)
बाह्य परिक्रमा (तिब्बती: छोखोर) मुख्य परिक्रमा मार्ग है, जिसकी कुल लंबाई लगभग 52 किलोमीटर है। इसका सर्वोच्च बिंदु डोलमा ला दर्रा (5,630 मीटर / 18,471 फ़ीट) है।
मार्ग की विशेषताएँ
- कैलाश पर्वत की पूर्ण परिक्रमा
- 5,630 मीटर की ऊँचाई पर डोलमा ला दर्रा पार करना
- सामान्यतः 2-3 दिन लगते हैं
- हिंदू और बौद्ध दक्षिणावर्त (घड़ी की दिशा में), बोनपो विपरीत दिशा में परिक्रमा करते हैं
तीन दिन की परिक्रमा——दिन-दर-दिन
पहला दिन: तारछेन (4,575 मी) से चलकर अपेक्षाकृत समतल मार्ग से चुकु मठ के पास से गुज़रते हुए दिरापुक मठ तक। लगभग 6-7 घंटे की पैदल यात्रा, दूरी ~20 किमी।
दूसरा दिन: सबसे कठिन दिन। दिरापुक से डोलमा ला दर्रे की तीव्र चढ़ाई, फिर ज़ुतुलपुक मठ की ओर उतराई। दर्रे से पहले “शिव त्साल” नामक शिला क्षेत्र आता है, जहाँ तीर्थयात्री अपने वस्त्र छोड़कर सांकेतिक रूप से अपने पूर्व जन्म का अंत करते हैं। लगभग 7-8 घंटे, दूरी ~18 किमी।
तीसरा दिन: ज़ुतुलपुक से तारछेन वापसी। अपेक्षाकृत आसान रास्ता, दूर से मानसरोवर झील के दर्शन होते हैं। लगभग 4-5 घंटे, दूरी ~14 किमी।
तीन प्रमुख मठ
- चुकु मठ (Chuku Gompa): परिक्रमा मार्ग के प्रारंभ के पास, कैलाश का दक्षिणी दृश्य
- दिरापुक मठ (Drirapuk Gompa): दूसरे दिन का विश्राम स्थल, कैलाश के उत्तरी भाग का सर्वाधिक निकट से दर्शन
- ज़ुतुलपुक मठ (Zutrul Puk Gompa): वह गुफ़ा जहाँ मिलारेपा ने तपस्या की थी
आंतरिक परिक्रमा (अंदरूनी कोरा)
आंतरिक परिक्रमा (तिब्बती: नांगखोर) छोटी किंतु अधिक कठिन है, लगभग 20 किलोमीटर लंबी। इसमें अधिक ऊँचाई वाले तीव्र ढलान वाले रास्तों को पार करना पड़ता है।
मार्ग की विशेषताएँ
- कैलाश पर्वत के बिल्कुल निकट से गुज़रती है
- खड़ी चढ़ाइयाँ, कुछ स्थानों पर चट्टानों पर चढ़ना पड़ता है
- सामान्यतः 1 दिन में पूरी की जाती है (अत्यधिक शारीरिक क्षमता आवश्यक)
- तेरह वज्र स्तूपों (13 मणि पत्थरों के ढेर) से होकर गुज़रती है
सावधानी
आंतरिक परिक्रमा अधिक ख़तरनाक है। अधिक ऊँचाई और खड़ी चट्टानों के कारण चोट लगने और रास्ता भटकने का जोखिम अधिक होता है। केवल अनुभवी ट्रेकर्स और पूर्ण शारीरिक स्वास्थ्य वाले व्यक्तियों को ही यह प्रयास करना चाहिए। पारंपरिक रूप से, आंतरिक परिक्रमा से पहले बाह्य परिक्रमा पूरी करना अनिवार्य माना जाता है।
धार्मिक महत्व
- बाह्य परिक्रमा: विश्व के केंद्र की परिक्रमा का प्रतीक, जो तन (कर्म), वाणी (वचन), और मन (विचार) को शुद्ध करती है
- आंतरिक परिक्रमा: आध्यात्मिक रूप से अधिक शक्तिशाली, परंतु इसके लिए उच्च आध्यात्मिक स्तर की आवश्यकता होती है
- परंपरानुसार, पहले बाह्य परिक्रमा पूर्ण करनी चाहिए, तत्पश्चात ही आंतरिक परिक्रमा का प्रयास करें
परिक्रमा का सर्वोत्तम समय
- सर्वोत्तम समय: मई के अंत से सितंबर के अंत तक
- मुख्य सीज़न: जुलाई-अगस्त (परंतु मानसून का भी समय)
- अश्व वर्ष (2026): इस वर्ष एक परिक्रमा का पुण्य सामान्य वर्षों की तेरह परिक्रमाओं के बराबर होता है
भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए व्यावहारिक जानकारी
प्रवेश की अनुमति और दस्तावेज़
- तिब्बत में प्रवेश के लिए तिब्बत यात्रा परमिट अनिवार्य है। यह केवल पंजीकृत चीनी ट्रैवल एजेंसियों के माध्यम से ही प्राप्त किया जा सकता है
- भारतीय पासपोर्ट धारकों को चीनी वीज़ा की आवश्यकता होती है
- आधिकारिक कैलाश-मानसरोवर यात्रा (विदेश मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित) में सभी परमिट शामिल होते हैं
खर्च (अनुमानित, 2026)
- सरकारी यात्रा (MoEA): लगभग ₹1.6-2 लाख प्रति व्यक्ति (दिल्ली से दिल्ली तक)
- निजी टूर ऑपरेटर (नेपाल मार्ग): लगभग ₹1.2-2.5 लाख प्रति व्यक्ति
- अतिरिक्त खर्च: पोर्टर/टट्टू किराया (~₹3,000-5,000 प्रति दिन), टिप, व्यक्तिगत खर्च
भारत से मार्ग
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नाथूला मार्ग (आधिकारिक): दिल्ली → कोलकाता → सिक्किम → नाथूला दर्रा → तिब्बत → कैलाश। यह भारत सरकार की आधिकारिक कैलाश-मानसरोवर यात्रा का मार्ग है।
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लिपुलेख मार्ग (पारंपरिक): दिल्ली → उत्तराखंड → पिथौरागढ़ → लिपुलेख दर्रा → तिब्बत। प्राचीन काल से प्रयुक्त मार्ग, सीमित उपलब्धता।
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नेपाल मार्ग (लोकप्रिय): दिल्ली → काठमांडू → ल्हासा → कैलाश। अधिकतर निजी यात्राएँ इसी मार्ग से जाती हैं।
ऊँचाई से बचाव और स्वास्थ्य सलाह
- ल्हासा (3,650 मी) में कम-से-कम 2-3 दिन का अनुकूलन (एक्लीमैटाइज़ेशन) अति आवश्यक
- डायमॉक्स (एसिटाज़ोलामाइड) दवा ऊँचाई की बीमारी से बचाव में सहायक——डॉक्टर के परामर्श से लें
- पर्याप्त पानी पीते रहें और शराब से पूर्ण परहेज़ करें
- 60 वर्ष से अधिक आयु या हृदय/श्वास रोगों वाले व्यक्तियों को डॉक्टर की पूर्ण जाँच के बाद ही यात्रा करनी चाहिए
रहने और भोजन की व्यवस्था
- तारछेन में साधारण गेस्टहाउस उपलब्ध हैं
- परिक्रमा मार्ग पर रुकने के लिए बहुत ही सादे गेस्टहाउस या टेंट की व्यवस्था होती है
- गर्म स्लीपिंग बैग (−10°C तक) अवश्य ले जाएँ
- शाकाहारी भोजन उपलब्ध है, तिब्बती रोटी, दाल-चावल, मैगी, और तिब्बती चाय मुख्य विकल्प हैं